अध्याय 406

सूरज तेज़ चमक रहा था, लेकिन लुईस को ज़रा भी गर्माहट महसूस नहीं हो रही थी।

वह अकड़ा हुआ खड़ा रहा, पीछे से किसी के हाँफने की आवाज़ सुनता हुआ।

“लुईस, तुम इतनी तेज़ क्यों चल रहे हो?”

“ताकि तुम दोनों के बीच मैं टाँग न अड़ाऊँ, और क्या।”

शब्द मुँह से निकलते ही लुईस को पछतावा हो गया।

ऐसी जलन भरी बातें ...

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