अध्याय 93

जब आरिया की आँख फिर से खुली, तो सिर ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था और नज़र धुंधली थी।

हवा में कारख़ानों के कचरे की सड़ी-सी बदबू इतनी घनी थी कि साँस लेना भारी लग रहा था। उसके हाथ पीठ पीछे बँधे थे, हिलना-डुलना नामुमकिन।

“होश आ गया?” ईथन की आवाज़ बर्फ़-सी ठंडी और डरावनी थी।

आरिया उसे देख नहीं पा रही थी—बस...

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