अध्याय 40 मूविंग आउट, नेवर कमिंग बैक

सोफिया बच्चों के पलंग से टिककर ही ऊँघ गई थी। ज़ोई की कॉल ने उसे जगा दिया तो उसकी गर्दन लकड़ी के तख्ते की तरह अकड़ चुकी थी।

उसने सिर को अटपटा-सा एक ओर झुकाए हुए फोन उठाया। नींद पूरी न होने से आवाज़ भी बैठी हुई थी। “क्या हुआ?”

उधर ज़ोई लगातार आहें भर रही थी। “मैं ठीक से बता भी नहीं पा रही। बस फोन खो...

लॉगिन करें और पढ़ना जारी रखें