अध्याय 100

एमिली को काफी देर तक जड़-सा बैठे देखकर, लॉरा का सब्र जवाब देने लगा।

“एमिली, अभी यहीं आ जाओ। अगर मेरी इतनी ‘मेहरबानी’ की क़दर नहीं, तो मैं नौकरों को बुला कर इसी वक्त तुम्हें बँधवा दूँगी।”

“मुझे पानी चाहिए।”

एमिली के अचानक निकले शब्द हवा को चीरते हुए निकल गए; उसकी नज़र बर्फ़ जैसी ठंडी थी।

“मैंने आ...

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