अध्याय 156

जोश का चेहरा बुरी तरह उतरा हुआ था। सामने जो हो रहा था उसे घूरते हुए उसके मन में बस यही इच्छा थी कि काश वह इसी पल ज़मीन में धँस जाए।

उसे ज़रा भी उम्मीद नहीं थी कि एमिली उसके बिछाए जाल से बच निकलेगी—और ऊपर से उसकी ठगी सबके सामने उजागर करके, इतनी भीड़ में उसकी इज़्ज़त भी मिट्टी में मिला देगी।

भीड़ मे...

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