अध्याय 187

वक़्त पंख लगाकर उड़ गया था, और अब कड़ाके की सर्दियाँ आ चुकी थीं—क्रिसमस बस कुछ ही दिनों में आने वाला था।

शाम की हवा में सर्द रात की तीखी ठंडक थी, जो एमिली की कनपटियों के पास से उड़ते बालों की लटों को उठाकर बिखेर देती। उसी एक झोंके के साथ, बॉलरूम का सारा शोर-शराबा और चमक-दमक जैसे छितराकर दूर कहीं खो...

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