अध्याय 23

उन शब्दों के साथ ही, लॉरा के जो हाथ पल भर को ढीले पड़े थे, वे फिर कसकर मुट्ठियों में बँध गए। चेहरे पर कौंधी दहशत को जबरन दबाते हुए वह अनायास एक कदम आगे बढ़ी।

ज़मीन पर पड़े आदमी को, फिर एमिली को देखकर, लॉरा के होंठों से एक कड़वी-सी, खोखली हँसी निकल गई।

“एमिली, तुम ज़रूर इसे मजबूर कर रही हो। इतनी खु...

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