अध्याय 249

लौरा कदम बढ़ाते-बढ़ाते एकदम ठिठक गई। रीढ़ पत्थर की तरह अकड़ गई, उँगलियाँ इतनी कसकर मुट्ठी में बंद थीं कि नाखून हथेलियों में अर्धचंद्र बना रहे थे। उसके सीने में नफ़रत और घबराहट आपस में गुत्थमगुत्था हो रही थीं।

वह जानती थी, एमिली बहुत तेज़ है। उसकी बहन बिना वजह यहाँ नहीं आएगी—और वह वजह अच्छी तो हो ही...

लॉगिन करें और पढ़ना जारी रखें