अध्याय 31

अपहरणकर्ता ने नफ़रत से दाँत पीसे, हाथ में चाकू कसकर थामे हुए था; उसकी आँखों में खून की प्यासी वहशत भरी हुई थी।

मानो अचानक कुछ याद आ गया हो, वह पागलों की तरह हँसा, फिर धीरे-धीरे अपना खून से सना चाकू अपने पास खड़ी बंधक के गले पर टिकाने लगा।

यह देखते ही वहाँ मौजूद हर किसी को समझ आ गया कि उसका इरादा क...

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