अध्याय 44

एमिली की मुट्ठियाँ बगल में बार-बार भींचती और ढीली होती रहीं। आखिर में उसने कुछ नहीं कहा। डेक्स्टर ने जो प्रस्ताव उस पर फेंका था, उसे उठाया और ऊपर-ऊपर पढ़ने लगी।

प्रस्ताव साफ-सुथरा था, कहीं कोई नोट या टिप्पणी नहीं। एमिली के मन में आया—क्या डेक्स्टर ने इसे पढ़ने की ज़हमत भी उठाई थी?

“ये प्रस्ताव घटि...

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