अध्याय 155

झील धूप में झिलमिला रही थी। यह सुकूनभरा पल मुश्किल से आधा घंटा ही टिक पाया था कि एक मुलायम-सी आवाज़ ने उसे तोड़ दिया।

“आर्थर! अरे, क्या संयोग है!”

एलेन एकदम ठिठक गई। वह आवाज़ वह बहुत अच्छी तरह पहचानती थी।

ऊपर देखे बिना ही उसकी पलकों में हल्की-सी फड़फड़ाहट हुई, फिर उसने खुद को संभाल लिया और मुस्कु...

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