अध्याय 206

अगली सुबह, भोर की रौशनी अभी ठीक से फैली भी नहीं थी।

विक्टर सोफ़े पर बैठे थे। आँखों पर पढ़ने का चश्मा, हाथ में आज के अख़बार का आर्थिक पन्ना, और माथे पर चिंता की लकीरें।

बाहर से कार के इंजन की आवाज़ आई। कुछ ही पल बाद, घर के नौकर-चाकर और मेडिकल स्टाफ के साथ लूना अंदर आईं।

अस्पताल में रहने के समय की ...

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